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Navratri 2025: नवरात्रि के महासप्तमी पर करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें विधि, मुहूर्त, मंत्र और भोग
Navratri 2025: नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस नौ दिवसीय उत्सव में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। आज 29 सितंबर को नवरात्रि का सातवां दिन, यानी महासप्तमी है, जो सोमवार को पड़ रहा है। इस दिन मां दुर्गा के सातवें रूप मां कालरात्रि की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। आश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि शाम 4:32 बजे तक रहेगी। मां कालरात्रि का स्वरूप भले ही भयावह लगे, लेकिन यह अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। उनकी उपासना से भूत-प्रेत, बुरी शक्तियां और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। तांत्रिक और योगी विशेष रूप से इस स्वरूप की साधना करते हैं, क्योंकि इससे सिद्धियां प्राप्त होती हैं। देवी को शुभंकरी, महायोगीश्वरी और महायोगिनी के नाम से भी जाना जाता है।
Navratri 2025: मां कालरात्रि का स्वरूप
मां कालरात्रि का स्वरूप काले रंग का है, जिसमें विशाल केश चारों दिशाओं में फैले रहते हैं। उनकी चार भुजाएं और तीन नेत्र हैं। ऊपरी दाहिनी भुजा वर मुद्रा में, निचली अभय मुद्रा में है। बाईं ओर ऊपरी हाथ में लोहे का कांटा और निचला हाथ खड़ग धारण किए हुए हैं। आंखों से अग्नि बरसती है और वाहन गधा है। श्लोक में कहा गया है: "एक वेधी जपाकरर्णपूरा नग्ना खरास्थित, लम्बोष्ठी कर्णिकाकणी तैलाभयुक्तशरीरिणी। वामपदोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकारी।"
Navratri 2025: पूजा का शुभ मुहूर्त
मां कालरात्रि की पूजा के लिए नवरात्रि के सातवें दिन के शुभ मुहूर्त - ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:37 से 05:25 तक है, जो प्रातःकालीन पूजा के लिए अत्यंत पवित्र समय माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:47 से 12:35 तक रहेगा, जो मध्याह्न में पूजा के लिए शुभ है। विजय मुहूर्त दोपहर 02:11 से 02:58 तक है, जो कार्यों में सफलता के लिए उपयुक्त समय है। इसके अलावा, गोधूलि मुहूर्त शाम 06:09 से 06:33 तक रहेगा, जो सायंकालीन पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इन मुहूर्तों में मां कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों को उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
Navratri 2025: पूजा विधि:
सुबह और शाम दोनों समय शुभ हैं। स्नान कर लाल कंबल के आसन पर बैठें। पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें, लकड़ी की चौकी पर मां की प्रतिमा स्थापित करें। घी का दीपक जलाएं, अक्षत, रोली, गुड़हल के फूल अर्पित करें। हवन में लौंग, बताशा, गुग्गल डालें। परिवार संग जयकारे लगाएं, दुर्गा चालीसा या सप्तशती का पाठ करें। शाम को आरती उतारें और रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से मंत्र जाप करें।
Navratri 2025: मंत्र:
मुख्य मंत्र हैं- "ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥", "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः", "या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।" अन्य: "जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणि, जय सार्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते।"
Navratri 2025: भोग:
मां को गुड़ से बनी चीजें प्रिय हैं। गुड़ का चना, शहद या मालपुआ का भोग लगाएं। मालपुआ बनाने की विधि: 1 कप मैदा, 1 कप कद्दूकस खोया, 1/2-1 कप पानी से बैटर बनाएं। घी में पकाएं, गुड़ की चाश्नी में भिगोएं। ऊपर बादाम, पिस्ता, केसर डालें। इससे मां प्रसन्न होकर मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
Navratri 2025: कथा:
प्राचीन काल में शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज राक्षसों ने आतंक मचा रखा था। देवताओं की प्रार्थना पर शिवजी ने पार्वती से मदद मांगी। दुर्गा ने रक्तबीज का वध करने हेतु कालरात्रि रूप धारण किया। रक्तबीज के रक्त से नए दानव उत्पन्न होने से रोकने के लिए मां ने रक्त को मुख में भर लिया और उसका अंत किया। इस दिन का
Navratri 2025: रंग:
नीला, काला हरा,और ग्रे। भक्तों को इन रंगों में वस्त्र धारण करने चाहिए।
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