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Virendra Yadav passes away: प्रख्यात हिंदी आलोचक वीरेंद्र यादव का निधन, साहित्य जगत में शोक की लहर
Virendra Yadav passes away: लखनऊ। हिंदी साहित्य के प्रमुख आलोचक और प्रगतिशील लेखक वीरेंद्र यादव का शुक्रवार सुबह (16 जनवरी 2026) हृदय गति रुकने से निधन हो गया। वे 76 वर्ष के थे और इंदिरानगर, लखनऊ में रहते थे। उनके निधन से साहित्य जगत में गहरा शोक व्याप्त है।
Virendra Yadav passes away: वीरेंद्र यादव का जन्म 5 मार्च 1950 को जौनपुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीतिशास्त्र में एमए करने वाले यादव छात्र जीवन से ही वामपंथी बौद्धिक और सांस्कृतिक आंदोलनों में सक्रिय रहे। उत्तर प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ के लंबे समय तक सचिव रहे और ‘प्रयोजन’ पत्रिका के संपादक के रूप में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
Virendra Yadav passes away: कथा-आलोचना के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय माना जाता है। वे समाज, इतिहास और सत्ता-संरचना से जुड़ी हस्तक्षेपकारी आलोचना के लिए जाने जाते थे। प्रेमचंद विमर्श और 1857 की चर्चाओं में उनकी बहसें दिशा-निर्देशक रही। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘उपन्यास और वर्चस्व की सत्ता’, ‘उपन्यास और देस’, ‘प्रगतिशीलता के पक्ष में’ शामिल हैं। जॉन हर्सी की पुस्तक ‘हिरोशिमा’ का हिंदी अनुवाद भी उनका उल्लेखनीय कार्य रहा। कई लेखों के अंग्रेजी-उर्दू अनुवाद प्रकाशित हुए। साहित्यिक विवेक और प्रगतिशील आंदोलन से गहराई से जुड़े वीरेंद्र यादव की कमी लंबे समय तक खलेगी।
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