Atal Bihari Vajpayee: अटल बिहारी वाजपेयी जन्मशती आज, दोस्त से मिलने काफिला छोड़ पैदल ही निकल पड़े थे वाजपेयी... जानिए उनके जीवन के रोचक किस्से...
Atal Bihari Vajpayee: नई दिल्ली: 25 दिसंबर को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती देशभर में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। अटल जी को उनकी दूरदर्शिता, राजनीतिक कौशल और देशभक्ति के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनके द्वारा स्थापित किए गए मूल्यों—अखंडता, एकता और प्रगति—की आज भी गहरी छाप भारतीय राजनीति में देखने को मिलती है। यह दिन न केवल उनके योगदान को सम्मानित करने का अवसर है, बल्कि उनके नेतृत्व की प्रेरणा से भी भारतीय समाज को जोड़ने का एक महत्वपूर्ण पल है। अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी एक शिक्षक और कवि थे। अटल जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज से प्राप्त की और फिर कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री हासिल की।

Atal Bihari Vajpayee: राजनीतिक सफर-
वाजपेयी का राजनीतिक जीवन 1939 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ने से शुरू हुआ। उन्होंने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और इसके बाद भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य बने। 1957 में उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा और धीरे-धीरे भारतीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। 1968 में वे भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। इसके अलावा सात बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे।
USA में हिंदी में दिया भाषण-
अटल जी भारतीय राजनीति के पहले विदेश मंत्री थे जिन्होंने 1977 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण दिया। 1980 में भारतीय जनसंघ को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में रूपांतरित किया और इसके पहले अध्यक्ष बने। उनका प्रधानमंत्री बनने का सफर 1996 में शुरू हुआ, और वे देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया।

दोस्त से मिलने काफिला छोड़ पैदल ही मिलने पहुंचे थे अटल बिहारी वाजपेयी-
1996 में, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ग्वालियर में माधव कॉलेज के पूर्व प्राचार्य श्रीधर कुंटे के निधन पर शोक व्यक्त करने पहुंचे, तो रास्ते में उन्हें भाऊसाहेब पोतनीस के बीमार होने की खबर मिली। गाड़ियों का काफिला उनके इंतजार में था, लेकिन पोतनीस का घर विपरीत दिशा में था। इस पर अटल जी ने कहा, "हम पैदल चलते हैं।" और फिर वह अपने एक साथी के साथ पैदल ही पोतनीस के घर पहुंचे। यह गजब की सादगी और दोस्ती का उदाहरण था। पोतनीस से मुलाकात के दौरान संक्रांति पर्व के अवसर पर उनके घरवालों ने अटल जी को तिल-गुड़ दिया और कहा, "तिल-गुड़ लो और मीठा-मीठा बोलो।"

लाइन लगकर खरीदी थी टिकट-
अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन सादगी और विनम्रता का प्रतीक था। एक दिलचस्प घटना के अनुसार, 1970 के दशक में ग्वालियर में फिल्म देखने के लिए अटल जी ने लाइन में लगकर टिकट खरीदी थी, जबकि उस समय उनके आसपास के लोग उन्हें पहचान कर हैरान हो गए थे। इसी तरह, प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वह ग्वालियर के अपने पुराने घर का दौरा करने गए और वहां गली में बैठकर अपने पुराने दोस्तों और परिचितों से बातचीत की।

आध्यात्मिक जुड़ाव और संघर्ष-
अटल जी की राजनीति के अलावा उनका व्यक्तित्व भी अत्यंत प्रेरणादायक था। उनका जीवन देश के प्रति गहरी निष्ठा और समर्पण का प्रतीक था। उनके द्वारा किए गए कार्यों और उनके जीवन के अनुभवों ने उन्हें एक सशक्त और सम्मानित नेता बना दिया।

