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UP News : योगी सरकार का फैसला, मुख्यमंत्री आवास योजना का दायरा बढ़ाया, इन जातियों को भी मिलेगा लाभ

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UP News : लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने समाज के सबसे वंचित और पिछड़े तबकों को सशक्त बनाने के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को घोषणा की कि 'मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण' के दायरे को और अधिक व्यापक बनाया गया है। इस फैसले के तहत अब प्रदेश की उन सभी अनुसूचित जनजातियों को पात्रता सूची में शामिल किया गया है, जो अब तक पक्के आवास की सुविधा से वंचित थीं।


UP News : वंचित जातियों को मुख्यधारा से जोड़ने की पहल

केशव प्रसाद मौर्य ने इस योजना को समाज के सबसे गरीब और वंचित वर्गों के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 'डबल इंजन' सरकार हर व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस फैसले के बाद अब भोटिया, जौनसारी, राजी, गोंड, और अन्य जनजातियों को भी पक्के आवास का लाभ मिलेगा। मौर्य ने पूर्ववर्ती सरकारों पर आरोप लगाया कि उन्होंने इन जनजातियों को कभी मुख्यधारा से जोड़ने का ईमानदार प्रयास नहीं किया, बल्कि इन्हें सिर्फ एक वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया।


UP News : मुख्यमंत्री आवास योजना का इतिहास

मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी, जिसमें अति-पिछड़ी जातियों जैसे वनटांगिया और मुसहर को प्राथमिकता दी गई थी। समय के साथ सरकार ने इस योजना में कई अन्य जनजातियों को जोड़ा, जैसे कोल, थारू, सहरिया, नट, चेरो, बैगा, बोक्सा, बंजारा, और सपेरा। अब सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी जनजातीय परिवार बिना घर के न रहे, इसलिए सभी शेष जनजातियों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।


UP News : नई जातियों को मिलेगा लाभ

अब इन जातियों के परिवार मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्के घर के लिए आवेदन कर सकेंगे:


भोटिया, जौनसारी, राजी, और गोंड

गोंड की पर्याय जातियाँ: धुरिया, ओझा, नायक, पठारी, और राजगोंड

अन्य समूह: खरवार, खैरवार, परहिया, पंखा, पनिका, अगरिया, पटारी, भुइयां, और भुनिया


UP News : सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

इस फैसले का उद्देश्य उन दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षा प्रदान करना है, जो आज भी कच्चे घरों या झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन जातियों के परिवारों का सर्वे कर उन्हें जल्द से जल्द इस योजना से जोड़ा जाए। यह कदम न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि उन जनजातियों के जीवन स्तर में भी सुधार लाएगा, जो दशकों से सरकारी योजनाओं का इंतजार कर रहे थे।

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