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भोपाल के हमीदिया हॉस्पिटल में एंबुलेंस का रहेगा लिखित रिकॉर्ड, दलालों के पास से मिले निजी अस्पताल के विजिटिंग कार्ड
भोपाल। दलाली गिरोह का भंडाफोड़ होने के बाद अब हमीदिया अस्पताल की व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन हुआ है। अब यहां पर एम्बुलेंस आने और जाने का पूरा लिखित रिकार्ड रखा जाएगा। वाहन का बाकायदा भौतिक परीक्षण होगा। अस्पताल में मरीजों को लेकर चल रही दलाली को लेकर लंबी बैठक के बाद बुधवार को प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। अस्पताल अधीक्षक ने स्वयं इस गिरोह को पकड़ा था।
इसके बाद थाना में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इनमें से तीन आरोपी उसी दिन गिरफ्तार किए गए थे। आयुष्मान कार्डधारी मरीजों को यहां से दूसरे अस्पतालों में भेजने का सच सामने आने के बाद बुधवार को हमीदिया अस्पताल और गांधी मेडीकल कॉलेज में दिन भर बैठकों का दौर चला। फिर निर्णय हुआ कि अब बिना अनुमति कोई भी एम्बुलेंस प्रवेश नहीं कर पाएगी।
इनका पूरा लिखित रिकार्ड रखा जाएगा। एम्बुलेंस परिसर में आई तो कहीं भी नहीं ठहरेगी। अगर वाहन रूकता है तो कोई किसी से बात करता है तो उसकी वीडियोग्राफी होगी। इसकी रिकार्डिंग निकाली जाएगी कि क्या बामें कर्मचारियों की रोटेशन ड्यूटी लगाई जाएगी। जो लोग गिरफ्तार किए गए, पुलिस ने उनसे क्या सच उगलवाया है। उसकी भी जानकारी ली। ताकि यह पता किया जा सके कि इस कार्य में और कितने लोग शामिल थेत हुई है। हमीदिया अस्पताल में कर्मचारियों की माने तो दलालों का यहां यह कोई पहला गिरोह नहीं पकड़ा गया है।
पहले भी इस प्रकार के गिरोह पकड़े गये हैं, लेकिन इन पर कभी ठोस कार्यवाही नहीं हो पाई है। कर्मचारियों का कहना है कि अनेक सरकारी डाक्टरों के प्रायवेट अस्पताल और क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। अनेक कर्मचारियों के के परिजन दूसरे प्रायवेट अस्पताल और क्लीनिक में काम दूसर करते हैं। पूर्व में भी यह आरोप लगते रहे कि इन्हीं लोगों लोगों द्वारा अस्पताल में आते मरीजों को हर प्रयास करके प्रायवेट अस्पताल में उपचार कराने के लिए मजबूर किया जाता है।
हमीदिया अस्पताल में मिले 17 निजी अस्पतालों के आईडी व विजिटिंग कार्ड
हमीदिया अस्पताल में पकड़े गए दलालों के पास से हमीदिया प्रबंधन ने कुल 17 निजी अस्पतालों के आइडी कार्ड व विजिटिंग कार्ड बरामद किए हैं। प्रबंधन का कहना है कि यह गिरोह कितना बड़ा 1 है, है, इसका अंदाजा यह आंकडा ही दशार्ता है। यही कारण है कि हमीदिया में आयुष्मान की कन्वर्जन दर सिर्फ 45 फीसदी है। इस खेल में एंबुलेंस 108 के के कुछ ड्राइवर और सहायककर्मी भी शामिल हैं। यह मरीज और परिजन को पूरे रास्ते सरकारी अस्पताल में इलाज ना कराने के लिए डराते हैं।
इसके बाद सरकारी अस्पताल में मरीज के नाम का एडमिशन पर्चा बनवाते हैं। लेकिन मरीज को भर्ती नहीं कराते। इसके बाद अस्पताल से बहार निकल कर निजी एंबुलेंस में शिफ्ट कर देते हैं। इसके लिए अस्पताल ने डॉ. जीवन सिंह मीणा की अगुवाई में एक टीम तैयार की गई है। इसमें सिक्युरिटी के ऑपरेशन मैनेजर जयंत भारद्वाज और उनकी टीम को भी लगाया गया है।
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