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Rules changed in the new financial year 2026-27: 1 अप्रैल से बदल जाएंगे ये नियम; इनकम टैक्स, बैंकिंग से लेकर रेलवे तक हो रहे ये बदलाव, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर!

Rules changed in the new financial year 2026-27

Rules changed in the new financial year 2026-27

Rules changed in the new financial year 2026-27: नई दिल्ली: नया वित्तीय वर्ष 2026-27 कल यानी 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है। इस तारीख से देश के टैक्स, बैंकिंग, रेलवे, जीएसटी और रोजमर्रा के खर्च से जुड़े कई नियम बदल रहे हैं। ये बदलाव सीधे आपके वेतन, बचत, रसोई का बजट और यात्रा खर्च पर असर डालेंगे। पुराना आयकर अधिनियम 1961 अब इतिहास बन गया है और नया आयकर अधिनियम 2025 लागू हो रहा है। साथ ही जीएसटी 2.0 के तहत नए टैक्स स्लैब और छूट भी शुरू हो रहे हैं। इससे पहले कि 31 मार्च 2026 की आधी रात गुजर जाए, जान लीजिए कि 1 अप्रैल से क्या-क्या बदल रहा है और आपको कौन-कौन से काम 31 मार्च तक निपटाने होंगे। सब कुछ आसान भाषा में, विस्तार से समझते हैं।


1. आयकर अधिनियम 2025: टैक्स सिस्टम हुआ आसान और पारदर्शी

1 अप्रैल 2026 से पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह नया आयकर अधिनियम 2025 लागू हो जाएगा। अब ‘असेसमेंट ईयर’ और ‘प्रीवियस ईयर’ जैसे जटिल शब्दों की जगह सिर्फ ‘टैक्स ईयर 2026-27’ का इस्तेमाल होगा। सरकार ने टैक्स स्लैब को सरल बनाते हुए 12 लाख रुपये तक की शुद्ध वार्षिक आय को पूरी तरह करमुक्त कर दिया है। वेतनभोगियों को 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी जारी रहेगा। यानी अगर आपकी सालाना सैलरी 12.75 लाख रुपये तक है तो आपको कोई इनकम टैक्स नहीं देना पड़ेगा। पुरानी व्यवस्था में बच्चों का शिक्षा भत्ता सिर्फ 100 रुपये प्रति माह था, अब इसे बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया गया है। हॉस्टल भत्ता भी 300 रुपये से बढ़कर 9,000 रुपये हो गया है। मील वाउचर पर टैक्स छूट 50 रुपये से बढ़कर 200 रुपये हो गई है। एचआरए छूट के नियम भी बदले गए हैं। अब पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद और अहमदाबाद को भी टियर-1 शहरों में शामिल कर लिया गया है, यानी इन शहरों में 50% एचआरए छूट मिलेगी। सालाना किराया 1 लाख रुपये से ज्यादा होने पर मकान मालिक का PAN और यह जानकारी देना जरूरी होगा कि मकान मालिक आपका रिश्तेदार है या नहीं। नए कानून में कुल धाराएं 800 से घटकर लगभग 536 रह गई हैं। फॉर्म-16 की जगह अब फॉर्म 130 आएगा। सीनियर सिटीजन के लिए 15G और 15H को एक नए संयुक्त फॉर्म में बदल दिया गया है।


2. सैलरी स्ट्रक्चर और लेबर कोड में बदलाव

नए लेबर कोड के तहत बेसिक सैलरी अब कुल CTC का कम से कम 50% होनी चाहिए। इससे पीएफ और ग्रेच्युटी का योगदान बढ़ेगा, जो लंबे समय की बचत के लिए अच्छा है। हालांकि टेक-होम सैलरी थोड़ी कम हो सकती है। मेडिकल लोन पर टैक्स छूट पहले 20,000 रुपये तक थी, अब इसे बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया गया है।


3. जीएसटी 2.0: क्या सस्ता हुआ, क्या महंगा हुआ?

नई जीएसटी व्यवस्था में टैक्स स्लैब को 5%, 18% और 40% तक सीमित कर दिया गया है।

राहत वाले आइटम: स्वास्थ्य और जीवन बीमा, 33 जीवन रक्षक दवाएं और अनपैक्ड डेयरी उत्पाद अब 0% जीएसटी यानी टैक्स-फ्री हैं। छोटी कारें, एसी और टीवी 28% से घटकर 18% स्लैब में आ गए हैं।

महंगे आइटम: तंबाकू, लग्जरी वाहन, बड़ी एसयूवी और ऑनलाइन गेमिंग पर अब 40% जीएसटी लगेगा।


4. बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड और डिजिटल पेमेंट के नए नियम

क्रेडिट कार्ड से सालाना 10 लाख रुपये से ज्यादा खर्च करने वालों की जानकारी अब सीधे टैक्स विभाग को जाएगी। कई बैंक रिवॉर्ड पॉइंट्स और चार्जेस में बदलाव कर रहे हैं। डिजिटल पेमेंट ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) को मजबूत कर दिया गया है। अब सिर्फ OTP नहीं, बायोमेट्रिक या डिवाइस आधारित सुरक्षा भी अनिवार्य हो सकती है। एचडीएफसी बैंक अब यूपीआई आधारित कार्डलेस एटीएम निकासी को भी 5 मुफ्त ट्रांजेक्शन में गिनेगा। न्यूनतम बैलेंस न रखने पर जुर्माना अब शॉर्टफॉल के अनुपात में लगेगा, मनमाना नहीं। नए पैन कार्ड के लिए आधार के अलावा 10वीं का सर्टिफिकेट या जन्म प्रमाण पत्र भी जरूरी होगा।


5. पेंशन, बीमा और एनपीएस में बड़े बदलाव

एनपीएस में रिटायरमेंट पर अब 60% के बजाय 80% राशि एकमुश्त निकाली जा सकती है। अगर कॉर्पस 8 लाख रुपये या उससे कम है तो 100% एकमुश्त निकासी संभव है। हेल्थ इंश्योरेंस में ‘मोरेटोरियम अवधि’ (अधिस्थगन अवधि) घटाकर 5 साल कर दी गई है। 5 साल प्रीमियम भरने के बाद कंपनी पुरानी बीमारी का हवाला देकर क्लेम खारिज नहीं कर सकेगी।


6. शेयर बाजार और निवेश के नियम बदले

F&O ट्रेडिंग में ऑप्शंस पर STT बढ़ा दिया गया है। सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर मैच्योरिटी के समय कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। कंपनियों के शेयर बायबैक पर शेयरधारकों को भी टैक्स देना होगा। विदेश यात्रा अब सस्ती: ओवरसीज टूर पैकेज पर TCS की दर 5% और 20% से घटाकर सीधे 2% कर दी गई है।


7. रेलवे, हाइवे और यात्रा के सख्त नियम

ट्रेन टिकट कैंसिलेशन के नियम सख्त हो गए हैं। अब ट्रेन छूटने से 8 घंटे पहले तक ही कन्फर्म टिकट कैंसिल करने पर रिफंड मिलेगा। इसके बाद कोई रिफंड नहीं। फास्टैग का एनुअल पास 3,000 रुपये से बढ़कर 3,075 रुपये हो गया है।


8. गैस, दवाएं और कारें महंगी होने वाली हैं

पश्चिम एशिया के तनाव के कारण घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गई है। कमर्शियल सिलेंडर 115 रुपये महंगा होकर 1,883 रुपये पहुंच गया है। 900 से ज्यादा जरूरी दवाओं (जैसे पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स) की कीमतें 1.74% तक बढ़ गई हैं। BS-7 उत्सर्जन मानकों की तैयारी के कारण टाटा मोटर्स, होंडा और मर्सिडीज जैसी कंपनियां 1 अप्रैल से कारों के दाम बढ़ा रही हैं (25,000 से 65,000 रुपये तक)।


31 मार्च 2026 से पहले ये 4 काम जरूर निपटा लें

-टैक्स सेविंग निवेश: धारा 80C और 80D के तहत PPF, ELSS, जीवन बीमा में निवेश 31 मार्च तक पूरा करें।

-खातों को सक्रिय रखें: PPF, NPS और सुकन्या समृद्धि योजना में न्यूनतम राशि जमा करें।

-अपडेटेड रिटर्न: वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 मार्च है।

-एनआरआई के लिए: विदेशी कर क्रेडिट का दावा करने के लिए फॉर्म 67 31 मार्च तक जमा करें।

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