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NCERT को मिला “डीम्ड यूनिवर्सिटी” का दर्जा, केंद्र का बड़ा फैसला, जानें शिक्षा और रिसर्च में क्या होगा बदलाव !

NCERT को डीम्ड यूनिवर्सिटी दर्जा मिलने की खबर

केंद्र सरकार ने NCERT को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया है, जिससे उसे अधिक स्वायत्तता मिलेगी, लेकिन UGC के नियमों और गुणवत्ता मानकों का पालन अनिवार्य रहेगा।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की सिफारिश पर “डीम्ड यूनिवर्सिटी” का दर्जा प्रदान कर दिया है। इस फैसले के बाद अब NCERT को विश्वविद्यालय की तरह शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य करने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, हालांकि इसके साथ कई महत्वपूर्ण शर्तें भी लागू की गई हैं। एनसीईआरटी ने वर्ष 2025 में सभी आवश्यक मानकों को पूरा करते हुए अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी, जिसे UGC की विशेषज्ञ समिति ने जांच के बाद सही पाया। इसके बाद जनवरी 2026 में UGC की बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी दी गई और केंद्र सरकार ने इसे अंतिम रूप दे दिया।


किन संस्थानों को किया गया शामिल?

NCERT ने UGC अधिनियम 1956 की धारा 3 के तहत आवेदन किया था, जिसे 2023 में “लेटर ऑफ इंटेंट” (LOI) के साथ मंजूरी मिली थी। इसमें तीन वर्षों के भीतर शर्तें पूरी करने का निर्देश दिया गया था। इस प्रस्ताव के अंतर्गत अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूर, शिलांग और भोपाल स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक शिक्षा संस्थान को शामिल किया गया है। इन सभी संस्थानों को मिलाकर NCERT को एक विशेष श्रेणी में डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया है।


किन शर्तों के साथ मिला दर्जा?

सरकार ने इस दर्जे के साथ सख्त नियम लागू किए हैं। इसके तहत NCERT बिना सरकार और UGC की अनुमति के अपनी संपत्ति या फंड ट्रांसफर नहीं कर सकेगा और किसी भी लाभ कमाने वाली गतिविधियों में शामिल नहीं होगा। संस्थान को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करना होगा।


पढ़ाई और कोर्स से जुड़े नियम

नई व्यवस्था के तहत NCERT को अपने सभी कोर्स UGC और अन्य शैक्षणिक संस्थाओं के नियमों के अनुसार संचालित करने होंगे। नए कोर्स, ऑफ-कैंपस सेंटर या विदेशी कैंपस शुरू करने के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य होगा। इसके अलावा, छात्रों के प्रवेश, सीटों की संख्या और फीस से जुड़े नियमों का पालन भी करना होगा।


रिसर्च और गुणवत्ता पर जोर

NCERT को अब रिसर्च, पीएचडी और नए शैक्षणिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देना होगा। साथ ही, संस्थान को NAAC और NBA से मान्यता प्राप्त करनी होगी। इसके अलावा, हर साल NIRF रैंकिंग में भाग लेना अनिवार्य होगा, ताकि संस्थान की गुणवत्ता और प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जा सके।

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