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SEBI decision brought back FPIs to domestic stock market: सेबी के फैसले से घरेलू शेयर बाजार में FPI की वापसी, बाजार में लौटी रौनक
- Pradeep Sharma
- 25 Mar, 2025
SEBI decision brought back FPIs to domestic stock market: सेबी बोर्ड ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए ग्रेन्यूलर डिस्क्लोजर की थ्रेसहोल्ड को 25,000 करोड़ रुपए से दोगुना कर 50,000 करोड़ रुपए करने को मंजूरी दी।
नई दिल्ली। SEBI decision brought back FPIs to domestic stock market: सेबी बोर्ड ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए ग्रेन्यूलर डिस्क्लोजर की थ्रेसहोल्ड को 25,000 करोड़ रुपए से दोगुना कर 50,000 करोड़ रुपए करने को मंजूरी दी। पहले जिन एफपीआई को 25 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा निवेश करने पर ज्यादा जानकारी देनी पड़ती थी, अब यह थ्रेसहोल्ड 50 हजार करोड़ रुपए हो गई है। ये डिस्क्लोजर पीएमएलए/पीएमएलआर नियमों का पालन सुनिश्चित करने से जुड़े हैं।
SEBI decision brought back FPIs to domestic stock market: सेबी के नए चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने कहा है कि भारत की रेगुलेटरी पॉलिसी का मकसद उन्हें (एफपीआई) डराना नहीं, बल्कि उनकी भागीदारी को सुविधाजनक बनाना है। उन्होंने कहा कि सेबी का मकसद मजबूत, पारदर्शी और निवेशक-हितैषी बाजार बनाना है। एफपीआई को तय करना है कि उन्हें कहां निवेश करना है और किस तरह के रिटर्न की अपेक्षा है। सेबी उन्हें ऐसा रेगुलेटरी माहौल देने का प्रयास कर रहा है जो उन्हें भारत में निवेश के लिए आकर्षित करे।
SEBI decision brought back FPIs to domestic stock market: SEBI के नए फैसले का भारतीय शेयर बाजार पर असर
1. विदेशी निवेश में हो सकती है बढ़ोतरी अब उन निवेशकों के लिए नियम आसान हो जाएंगे जो भारतीय बाजार में पैसा लगाना चाहते हैं. जब निवेशकों को कम कागजी कार्रवाई करनी पड़ेगी, तो वे भारत में ज्यादा पैसा लगा सकते हैं. इससे शेयर बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है।
2. बाजार में सकारात्मक माहौल बनेगा SEBI का यह कदम निवेशकों को भरोसा देगा कि भारत में निवेश के नियम लचीले और अनुकूल हैं. खासकर बैंकिंग, आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में विदेशी निवेश बढ़ सकता है, जिससे इनके शेयरों की कीमतें ऊपर जा सकती हैं।
3. छोटे विदेशी निवेशकों को राहत मिलेगी पहले जिन निवेशकों को 25,000 करोड़ रुपए से ज्यादा निवेश करने पर ज्यादा जानकारी देनी पड़ती थी, अब यह सीमा 50,000 करोड़ रुपए हो गई है। इससे छोटे निवेशकों पर कम दबाव पड़ेगा और वे ज्यादा सहजता से भारत में निवेश कर पाएंगे।
4. मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स पर असर बड़े निवेशक ज्यादातर बड़ी कंपनियों (लार्ज-कैप स्टॉक्स) में पैसा लगाते हैं. अगर विदेशी निवेश सिर्फ बड़ी कंपनियों में ही बढ़ता है, तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा असर नहीं दिख सकता।
5. भारतीय रुपए पर असर अगर विदेशी निवेश बढ़ता है, तो रुपए की मांग भी बढ़ सकती है, जिससे भारतीय रुपया मजबूत हो सकता है। रुपए की मजबूती से तेल और गैस कंपनियों को फायदा होगा, लेकिन आईटी और फार्मा कंपनियों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि उनकी कमाई विदेशी मुद्रा में होती है।
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