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Mohan Bhagwat: मोहन भागवत का बड़ा बयान- RSS सरसंघचालक किसी जाति का नहीं, केवल हिंदू होना जरूरी

Mohan Bhagwat

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Mohan Bhagwat: मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने स्पष्ट किया कि संघ का सरसंघचालक किसी विशेष जाति का नहीं होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय या किसी अन्य जाति से होना जरूरी नहीं, बल्कि केवल एक ही शर्त है वह व्यक्ति हिंदू होना चाहिए। भागवत ने मुंबई में आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में यह बात कही। इस दौरान कई प्रमुख हस्तियों ने भी हिस्सा लिया।


Mohan Bhagwat: भागवत ने अपने पद और उम्र को लेकर भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनकी उम्र 75 वर्ष हो चुकी है, लेकिन संघ ने उनसे काम जारी रखने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा, “संघ में पद छोड़ने का फैसला संगठन करता है, व्यक्ति नहीं। सरसंघचालक का कोई चुनाव नहीं होता, क्षेत्र और प्रांत के प्रमुख मिलकर चयन करते हैं। मैंने उम्र के बारे में बताया था, लेकिन संघ ने कहा कि काम जारी रखें। जब भी संघ कहेगा, मैं पद छोड़ दूंगा, लेकिन काम से कभी रिटायर नहीं होऊंगा।” उन्होंने जोर दिया कि संघ का काम जीवन भर चलता है, पद पर रहते हुए या मुक्त होकर भी।


Mohan Bhagwat: भागवत ने कहा कि परिस्थितियों पर ज्यादा ध्यान देने की बजाय समाधान खोजने पर जोर देना चाहिए। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि RSS स्वयंसेवकों से खून की आखिरी बूंद तक काम लेता है और इतिहास में कभी किसी को जबरन रिटायर नहीं किया गया।


Mohan Bhagwat: संघ का काम प्रचार नहीं, संस्कार देना है। उन्होंने कहा कि जरूरत से ज्यादा प्रचार अहंकार लाता है। प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए समय पर और उतना ही जितना आवश्यक। भाषा पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि RSS में अंग्रेजी माध्यम नहीं होगा, क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है, लेकिन जहां जरूरत पड़ेगी, वहां इस्तेमाल होगा। मातृभाषा को कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने दक्षिण भारत और विदेशों में संवाद के अपने अनुभव भी साझा किए।

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