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Online cricket betting busted: शंकरनगर में साइबर पुलिस की रेड, ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क से जुड़ा सॉफ्टवेयर इंजीनियर गिरफ्तार

Online cricket betting busted

आरोपी अपने गिरोह के साथ मिलकर सटोरियों को क्रिकेट सट्टा आईडी उपलब्ध कराने के साथ-साथ तकनीकी सहायता भी प्रदान करता था।

Online cricket betting busted: रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में साइबर पुलिस ने ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया है। आरोपी अपने गिरोह के साथ मिलकर सटोरियों को क्रिकेट सट्टा आईडी उपलब्ध कराने के साथ-साथ तकनीकी सहायता भी प्रदान करता था।


पुलिस को सूचना मिली थी कि न्यू शंकरनगर निवासी एक युवक अपने घर से कंप्यूटर और विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के लिए आईडी तैयार कर बेच रहा है। सूचना के आधार पर साइबर पुलिस ने छापेमारी की। पुलिस को देखकर एक युवक भागने का प्रयास करने लगा, जिसे घेराबंदी कर पकड़ लिया गया। पूछताछ में उसकी पहचान 28 वर्षीय आदर्श कुमार केशरी निवासी न्यू शंकरनगर, रायगढ़ के रूप में हुई।


पुलिस पूछताछ में आदर्श ने बताया कि वह बीटेक इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका है और वर्तमान में दिल्ली की एक आईटी कंपनी में कार्यरत है। वर्ष 2025 में उसकी मुलाकात रायपुर और बिहार के दो युवकों से हुई थी, जो नोएडा की आईटी कंपनियों में काम करते हैं। इनके माध्यम से वह ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क से जुड़ा और “Winbigpro” नामक प्लेटफॉर्म के तकनीकी संचालन और प्रबंधन का कार्य करने लगा। इसके बदले उसे 20 प्रतिशत कमीशन मिलता था।


टीवी प्रसारण से पहले उपलब्ध कराते थे मैच की जानकारी-

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी और उसके सहयोगियों ने क्रिकेट मैचों के प्रसारण में होने वाली तकनीकी देरी का अध्ययन कर एक ऐसी वेबसाइट विकसित की थी, जिस पर मैच से जुड़ी जानकारी सामान्य टीवी प्रसारण से लगभग पांच सेकंड पहले दिखाई देती थी। इस तकनीक का उपयोग बॉल-टू-बॉल सट्टेबाजी में सटोरियों को बढ़त दिलाने के लिए किया जाता था, जिससे वे तेजी से दांव लगाकर लाभ कमा सकें।


रायपुर सहित कई शहरों तक फैला था नेटवर्क-

पुलिस के अनुसार गिरोह विभिन्न सट्टा वेबसाइटों और डोमेन का अध्ययन कर उनसे मिलते-जुलते प्लेटफॉर्म तैयार करता था। इसके बाद रायपुर, भिलाई, बिलासपुर सहित कई शहरों के सटोरियों को आईडी उपलब्ध कराई जाती थी। पुलिस की नजर से बचने के लिए वेबसाइट के नाम, यूजर आईडी और पासवर्ड समय-समय पर बदले जाते थे। गिरोह में सोशल मीडिया प्रचार, आईडी बिक्री और वेबसाइट डेवलपमेंट के लिए अलग-अलग टीमें भी सक्रिय थीं।


भुगतान और विड्रॉल का काम भी संभालता था आरोपी-

पुलिस जांच में यह भी पता चला कि आदर्श केवल सट्टा आईडी बेचने तक सीमित नहीं था, बल्कि सटोरियों के भुगतान और विड्रॉल से जुड़े कार्यों में भी सहयोग करता था। उसने बताया कि वेबसाइट डेवलपमेंट और सट्टा संचालन में उपयोग किया जाने वाला उसका एचपी लैपटॉप दिल्ली स्थित ठिकाने पर रखा हुआ है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक सैमसंग एस-23 और एक वनप्लस मोबाइल फोन जब्त किया है।

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