BHOJSHALA-VAGDEVI-AARTI-HIGHALERT: भोजशाला में 721 साल बाद कल मां वाग्देवी की महाआरती, छावनी में तब्दील हुआ कमाल मौला परिसर, कोर्ट के फैसले के बाद हाई अलर्ट
- Rohit banchhor
- 21 May, 2026
हाई कोर्ट के फैसले के बाद पूरे परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
BHOJSHALA-VAGDEVI-AARTI-HIGHALERT: धार/भोपाल। मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर में शुक्रवार को होने वाली मां वाग्देवी की महाआरती और ‘अखंड पूजा’ को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। हाई कोर्ट के फैसले के बाद पूरे परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
भोज उत्सव समिति का दावा है कि 721 वर्षों बाद पहली बार इस प्रकार का आयोजन होने जा रहा है। प्रशासन चेतावनी दी है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले आज गुरुवार शाम धार के पुलिस अधीक्षक आईपीएस सचिन शर्मा ने मीडिया के सामने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अदालत के आदेश का गलत अर्थ निकालने या सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि “जिसे कानून को चुनौती देना है, वह प्रयास कर ले, प्रशासन पूरी तरह तैयार है और ऐसी कार्रवाई होगी जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।”
शहर में निकाला गया फ्लैग मार्च-
शुक्रवार को संभावित संवेदनशील स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने गुरुवार शाम शहर में विशाल फ्लैग मार्च निकाला। कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा के नेतृत्व में निकले इस मार्च में पुलिस और सुरक्षा बलों ने शक्ति प्रदर्शन के साथ शांति और सौहार्द का संदेश भी दिया।
फ्लैग मार्च के दौरान पुलिसकर्मियों के हाथों में तिरंगा था, जबकि डीजे पर भाईचारे और शांति के गीत बजाए गए। प्रशासन ने लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने की अपील की।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम,1500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात-
भोजशाला परिसर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में 1500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था में आरएएफ, एसटीएफ, एसएफ, अश्वरोही बल और जिला पुलिस बल को लगाया गया है। इसके अलावा ‘वज्र’ और ‘योद्धा’ जैसे विशेष सुरक्षा वाहन भी तैनात किए गए हैं।
ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से पूरे इलाके की निगरानी-
पूरे इलाके की निगरानी ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अदालत के आदेश का अक्षरशः पालन कराया जाएगा और किसी भी नई परंपरा या कानून विरोधी गतिविधि को अनुमति नहीं दी जाएगी।

