Artemis II: आर्टेमिस II ने रचा इतिहास, चंद्रमा की परिक्रमा कर पृथ्वी पर लौटे चारों अंतरिक्ष यात्री, प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन
- VP B
- 11 Apr, 2026
Artemis II यह 1972 के अपोलो 17 मिशन के बाद पहली बार था जब इंसान चंद्रमा के पास पहुंचे
Artemis II: नई दिल्ली: नासा के आर्टेमिस-II मिशन ने अंतरिक्ष इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। लगभग 10 दिन की ऐतिहासिक चंद्र यात्रा पूरी करने के बाद चारों अंतरिक्ष यात्री प्रशांत महासागर में सुरक्षित स्प्लैशडाउन के साथ पृथ्वी पर लौट आए। यह मिशन इंसानों के लिए बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रह है।
50 साल बाद चंद्रमा के पास इंसानी उड़ान
इस मिशन में रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसन शामिल थे। यह 1972 के अपोलो 17 मिशन के बाद पहली बार था जब इंसान चंद्रमा के पास पहुंचे और उसका फ्लाईबाय किया।
री-एंट्री: मिशन का सबसे खतरनाक चरण
पृथ्वी के वायुमंडल में वापसी के दौरान ओरियन यान ने करीब 40,000 किमी/घंटा की रफ्तार और 2,760°C तापमान डिग्री तापमान झेलते हुए पृथ्वी पर पहुंचा। इस दौरान कुछ मिनटों का कम्युनिकेशन ब्लैकआउट हुआ, जिससे वैज्ञानिको में तनाव बढ़ गया। हालांकि, पैराशूट खुलते ही सुरक्षित लैंडिंग के साथ मिशन कंट्रोल रूम में खुशी की लहर दौड़ गई।
रिकॉर्ड और वैज्ञानिक उपलब्धियां
अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी से लगभग 4,06,771 किलोमीटर दूर तक पहुंचकर नया रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने चंद्रमा के दूर वाले हिस्से, उल्कापिंडों की चमक और अंतरिक्ष से सूर्य ग्रहण जैसे दुर्लभ नजारे देखे। “अर्थसेट” जैसी अद्भुत तस्वीरें भी कैद की गईं।
विविधता और नए आयाम
यह मिशन विविधता के लिहाज से भी खास रहा। क्रिस्टीना कोच चंद्र मिशन पर जाने वाली पहली महिला बनीं, विक्टर ग्लोवर पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री और जेरेमी हैनसन पहले गैर-अमेरिकी बने।
चुनौतियां भी आईं सामने
मिशन के दौरान शौचालय और पानी-ईंधन प्रणाली में कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आईं, लेकिन टीम ने सफलतापूर्वक सभी चुनौतियों का सामना किया।
आगे की राह
आर्टेमिस-II की सफलता के बाद अब आर्टेमिस‑III और आर्टेमिस‑IV मिशनों की तैयारी तेज हो गई है। इन मिशनों के तहत चंद्रमा पर लैंडिंग और वहां स्थायी मानव कॉलोनी स्थापित करने की योजना है।

