Asaram: आसाराम की उम्रकैद बरकरार, हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, सेंट्रल जेल में करना होगा सरेंडर
Asaram: जयपुर: आसाराम से जुड़े नाबालिग यौन उत्पीड़न मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आसाराम को दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए उनकी अपील खारिज कर दी। हालांकि मामले में सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि पीड़िता के आरोप विश्वसनीय हैं और उन्हें पर्याप्त साक्ष्यों का समर्थन प्राप्त है। अदालत ने माना कि दुष्कर्म के मामले में पीड़िता का बयान महत्वपूर्ण और भरोसेमंद है, जिसके आधार पर दोष सिद्ध होता है। हाईकोर्ट ने धारा 376 आईपीसी के तहत ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को सही ठहराया।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने मामले को मनगढ़ंत बताते हुए गवाहों और पीड़िता के परिवार के बयानों में विरोधाभास होने की दलील दी थी। वहीं अभियोजन पक्ष ने कहा कि पॉक्सो मामलों में पीड़िता का अकेला बयान भी पर्याप्त माना जाता है। गौरतलब है कि 2018 में विशेष पॉक्सो अदालत ने आसाराम को अंतिम सांस तक कारावास की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद उन्हें जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर करना होगा।

