US-Iran: 300 अरब डॉलर का निवेश, लेबनान और होर्मुज जलमार्ग का समाधान, आखिर समझौते में क्या-क्या शामिल?
US-Iran: नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और लंबे समय से जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़े समझौते की कोशिशें तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच एक प्रारंभिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमति बनने के करीब है। प्रस्तावित डील के तहत 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाया जाएगा और इसी दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत कई अहम मुद्दों पर बातचीत शुरू होगी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है, लेकिन समझौते को अभी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। वहीं ईरान की ओर से कहा गया है कि अंतिम घोषणा तेहरान की सहमति के बाद ही की जाएगी। आइये जानें डील में क्या-क्या शामिल है?
1. 60 दिन का सीजफायर
प्रस्तावित समझौते के तहत दोनों देश 60 दिनों तक संघर्षविराम बनाए रखेंगे। इस दौरान स्थायी शांति समझौते पर विस्तृत वार्ता होगी।
2. होर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा
दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने का प्रस्ताव है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान समुद्री बारूदी सुरंगें हटाएगा, जबकि अमेरिका नौसैनिक प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार करेगा।
3. परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत
डील का सबसे संवेदनशील हिस्सा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी दे। साथ ही समृद्ध यूरेनियम भंडार और संवर्धन नियमों पर भी चर्चा होगी।
4. प्रतिबंधों में राहत
समझौते में अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में फंसी ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियों को लेकर भी बातचीत शामिल है।
5. लेबनान संकट पर फोकस
डील में लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी तनाव कम करने का प्रावधान भी शामिल बताया जा रहा है।
6. 300 अरब डॉलर निवेश योजना
रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतिम समझौते की स्थिति में ईरान के लिए 300 अरब डॉलर के अंतरराष्ट्रीय निवेश और पुनर्निर्माण कार्यक्रम पर भी चर्चा हो रही है।
किन मुद्दों पर अब भी मतभेद?
हालांकि दोनों देश समझौते के करीब बताए जा रहे हैं, लेकिन संघर्षविराम की शर्तों, होर्मुज जलडमरूमध्य और प्रतिबंध हटाने की समयसीमा को लेकर अब भी मतभेद बने हुए हैं। अमेरिका और ईरान दोनों अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं, जिससे अंतिम सहमति में अभी समय लग सकता है।

