भोपाल में बैठकर जूम कार ऐप्स से ठगी कर रहे थे पांच बदमाश, लग्जरी कारों के साथ ढाई करोड़ का माल जप्त
- Rohit banchhor
- 30 Jan, 2025
पांच शातिर आरोपी लंबे समय से मनरेगा मजदूरों के अकाउंट खरीद कर जूम कार ऐप्स के जरिए ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे थे।
MP Crime : भोपाल। भोपाल पुलिस ने देश के एक बड़े ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है। पांच शातिर आरोपी लंबे समय से मनरेगा मजदूरों के अकाउंट खरीद कर जूम कार ऐप्स के जरिए ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे थे। गिरोह का मास्टरमाइंड दसवीं पास है, जबकि ग्रुप में शामिल एक अन्य युवक ने एमबीए किया हुआ है। आरोपियों के पास से पुलिस ने दो बीएमडब्ल्यू, एक एसयूवी, 37 एटीएम कार्ड, 48 मोबाइल फोन और टैबलेट,13 चेक बुक, 92 सिम कार्ड,8 पासबुक,एक बार कोड और एक नोट गिनने की मशीन के साथ कई अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री जप्त की है। जप्त मशरूके की कीमत करीब ढाई करोड रुपए है।
MP Crime : पूरे मामले का खुलासा करते हुए डीसीपी डॉक्टर संजय अग्रवाल ने बताया कि अवधपुरी पुलिस को थाना क्षेत्र के रीगल टाउन के फ्लेट नंबर 301 में 5 आरोपियों के छुपे होने की सूचना प्राप्त हुई थी। मुखबिर ने सूचना दी थी के 5 युवक फ्लैट में रहते हैं जिनकी गतिविधियां संदिग्ध हैं, और महंगी गाड़ियों में सवार होकर क्षेत्र में घूमते हैं। पुलिस ने सूचना के बाद टीम बनाकर फ्लैट पर भेजी जहां से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उन्होंने बताया कि वह मुंबई दिल्ली से जैसे बड़े शहरों में किराए पर कार देने का ऐड जूम कार ऐप्स पर डालते थे,और वहां से आने वाला बुकिंग अमाउंट लेकर मोबाइल नंबर बंद कर लेते थे।

MP Crime : डीसीपी ने बताया कि Zoom एप पर ठगों ने अपना अकाउंट बना रखा था। अपने अकाउंट में महंगे गाड़ियों के फोटो डाल रखे थे। साइबर ठगों का मुख्य सरगना यश सलूजा दसवीं पास और एक आरोपी एमबीए पास है। पुलिस मामले में जूम एप को लेकर परिवहन विभाग में शिकायत करेगी। मामले में Zoom एप कंपनी की भी गड़बड़ी सामने आई है। प्राइवेट गाड़ियां कमर्शियल में इस्तेमाल की जा रही थी। आरोपी एक ठगी में एक सिम और एक मोबाइल का इस्तेमाल करते थे।

MP Crime : मोबाइल का ईएमआई नंबर ट्रेस ना हो इसलिए अगली ठगी में आरोपी मोबाइल बदलते थे। ठगी के पैसे जिन अकाउंट में आते वो मनरेगा हितग्राहियों के लिए खुलवाए गए थे। 10-10 हजार में अकाउंट खरीदे थे। आरोपियों के पास से जब्त की गई BMW और एक्सयूवी की जांच होगी कि गाड़ी आरोपियों की या है या उन्होंने कही से चोरी की थी।

