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UP News : RSS के 100वें वर्ष समारोह में मोहन भागवत की बड़ी घोषणा, काशी-मथुरा मंदिर आंदोलन का समर्थन नहीं करेगा संघ

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UP News : लखनऊ/नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दिल्ली के विज्ञान भवन में 26 से 28 अगस्त तक तीन दिवसीय समारोह का आयोजन किया। '100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज' थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में हजारों स्वयंसेवकों और गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। समारोह के अंतिम दिन गुरुवार को सरसंघचालक मोहन भागवत ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार रखे और काशी-मथुरा मंदिर आंदोलन को लेकर संघ की स्थिति स्पष्ट की।


UP News : काशी-मथुरा आंदोलन पर संघ की स्थिति


मोहन भागवत ने घोषणा की कि राम मंदिर आंदोलन ही एकमात्र ऐसा अभियान था, जिसका RSS ने प्रत्यक्ष रूप से समर्थन किया था। उन्होंने साफ किया कि संघ काशी और मथुरा सहित किसी अन्य मंदिर आंदोलन का समर्थन नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि स्वयंसेवक व्यक्तिगत रूप से ऐसे आंदोलनों में भाग लेने के लिए स्वतंत्र हैं। भागवत ने कहा, "राम मंदिर आंदोलन में संघ सीधे तौर पर शामिल था, लेकिन अब संघ किसी भी अन्य आंदोलन का हिस्सा नहीं बनेगा।"


UP News : धर्म और संस्कृति पर एकजुटता का संदेश


धर्म, संस्कृति और पूजा पद्धति पर पूछे गए सवाल के जवाब में भागवत ने एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "हिंदू हो या मुस्लिम, हमारी पहचान एक ही है। हमारी संस्कृति और पूर्वज एक ही हैं। केवल पूजा पद्धति अलग है, बाकी सब एक है।" उन्होंने अविश्वास को दूर करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इस्लाम भारत में है और हमेशा रहेगा, यह हिंदू सोच का हिस्सा है। दोनों समुदायों में विश्वास और भाईचारा बढ़ाने की जरूरत है। भागवत ने यह भी कहा कि धर्म बदलने से राष्ट्रीयता नहीं बदलती। उन्होंने सुझाव दिया कि शहरों और सड़कों के नाम आक्रांताओं के बजाय देशभक्तों, चाहे वे किसी भी समुदाय से हों, के नाम पर रखे जाने चाहिए।


UP News : भाषा विवाद पर विचार


भाषा के मुद्दे पर भागवत ने कहा कि भारत की सभी भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं। उन्होंने व्यवहार और संपर्क के लिए एक भारतीय भाषा को अपनाने की वकालत की, जो विदेशी न हो। उन्होंने कहा, "भाषा को लेकर विवाद नहीं होना चाहिए। प्रत्येक भाषा की अपनी समृद्ध परंपरा है, जिसे हमें सीखना और सम्मान करना चाहिए।" उन्होंने अपने बचपन का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने 'ऑलिवर ट्विस्ट' जैसी अंग्रेजी किताबें पढ़ीं, लेकिन इससे उनके हिंदुत्व प्रेम में कोई कमी नहीं आई। हालांकि, उन्होंने प्रेमचंद जैसे भारतीय साहित्यकारों की रचनाओं को प्राथमिकता देने की सलाह दी।


UP News : संघ के 100 साल: उपलब्धियां और भविष्य की दिशा


तीन दिवसीय समारोह में RSS ने अपनी सदी लंबी यात्रा को याद किया और भविष्य के लिए नए लक्ष्य निर्धारित किए। मोहन भागवत ने अपने संबोधन में सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने स्वयंसेवकों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का आह्वान किया।

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