UP News : हरिद्वार की गंगा आरती को ‘ऑक्सफोर्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में मिला स्थान, देश-विदेश से आते हैं श्रद्धालु
UP News : हरिद्वार : धर्मनगरी हरिद्वार की ऐतिहासिक गंगा आरती को ‘ऑक्सफोर्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में सम्मानित किया गया है। यह सम्मान श्री गंगा सभा को 1916 से लगातार हर की पैड़ी पर आयोजित होने वाली गंगा आरती के लिए प्रदान किया गया है। यह उपलब्धि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है।
UP News : श्री गंगा सभा को मिला प्रमाण पत्र
हर की पैड़ी के ब्रह्मा कुंड परिसर में स्थित श्री गंगा सभा के मुख्य कार्यालय में आयोजित एक समारोह में ऑक्सफोर्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के भारत प्रतिनिधि पंडित सुरेश मिश्रा ने सभा के अध्यक्ष पंडित नितिन गौतम, महामंत्री पंडित तन्मय वशिष्ठ और अन्य पदाधिकारियों को यह सम्मान प्रदान किया। इस अवसर पर श्री गंगा सभा को एक प्रमाण पत्र भी भेंट किया गया। मिश्रा ने बताया कि जून 2026 में लंदन के ऑक्सफोर्ड यूनियन कार्यालय में एक भव्य समारोह में श्री गंगा सभा के प्रतिनिधियों को विधिवत रूप से सम्मानित किया जाएगा।
UP News : 1916 से अनवरत गंगा आरती
श्री गंगा सभा 1916 से हरिद्वार के हर की पैड़ी पर गंगा आरती का आयोजन कर रही है। यह परंपरा कोविड-19 महामारी के दौरान भी निर्बाध रूप से जारी रही, जो सभा के समर्पण और धार्मिक भावना को दर्शाता है। इस अनूठी परंपरा ने न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं, बल्कि देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों का भी ध्यान आकर्षित किया है।
UP News : गंगा सभा के अध्यक्ष का बयान
श्री गंगा सभा के अध्यक्ष पंडित नितिन गौतम ने इस सम्मान को हरिद्वार और उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा, “यह उपलब्धि हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने का एक ऐतिहासिक कदम है। श्री गंगा सभा इस सम्मान से गौरवान्वित है और भविष्य में भी अपनी परंपराओं को और मजबूती के साथ निभाएगी।” उन्होंने आशा जताई कि सभा भविष्य में और बड़े सम्मानों से नवाजी जाएगी।
UP News : हरिद्वार की सांस्कृतिक धरोहर
हर की पैड़ी पर होने वाली गंगा आरती न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है। देश-विदेश से आने वाले नामचीन लोग और श्रद्धालु इस आरती में शामिल होने के लिए हरिद्वार पहुंचते हैं। ऑक्सफोर्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में इसकी जगह बनने से हरिद्वार की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी।

