Mahashivratri 2026 : धरती से प्रकट हुआ ‘जीवंत’ शिवलिंग, हर साल बढ़ता आकार, अर्धनारीश्वर रूप में होती है पूजा
- Rohit banchhor
- 15 Feb, 2026
गरियाबंद जिले में स्थित यह धाम प्रकृति प्रदत्त विश्व के सबसे विशाल शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है, जिसका आकार हर वर्ष बढ़ने की मान्यता है।
Mahashivratri 2026 : रायपुर। महाशिवरात्रि 2026 के अवसर पर जहां प्रदेशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है, वहीं भूतेश्वरनाथ मंदिर एक बार फिर आस्था और रहस्य का केंद्र बना हुआ है। गरियाबंद जिले में स्थित यह धाम प्रकृति प्रदत्त विश्व के सबसे विशाल शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है, जिसका आकार हर वर्ष बढ़ने की मान्यता है।
आस्था या चमत्कार? हर साल बढ़ रहा आकार-
भूतेश्वर नाथ महादेव के नाम से विख्यात यह शिवलिंग किसी मानव द्वारा निर्मित नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से प्रकट माना जाता है। स्थानीय मान्यता है कि भगवान शिव स्वयं यहां शिवलिंग स्वरूप में विराजमान हैं। बताया जाता है कि इसका आकार प्रतिवर्ष 6 से 8 इंच तक बढ़ता है। वर्तमान में इसकी ऊंचाई लगभग 18 फीट और गोलाई करीब 20 फीट बताई जाती है। पुरातत्व विभाग द्वारा समय-समय पर माप और परीक्षण किए जाते हैं, जिससे यह स्थल वैज्ञानिकों के लिए भी शोध का विषय बना हुआ है।
भकुर्रा महादेव: नाम के पीछे की लोककथा-
स्थानीय छत्तीसगढ़ी बोली में ‘भकुर्रा’ का अर्थ हुंकार या गूंज से जुड़ा है। इसी कारण भूतेश्वर नाथ को ‘भकुर्रा महादेव’ भी कहा जाता है। जनश्रुति के अनुसार, प्राचीन काल में यहां से बैल की आवाज और शेर की दहाड़ जैसी ध्वनियां सुनाई देती थीं। जमींदारी प्रथा के दौर में पारागांव निवासी शोभा सिंह ने सबसे पहले इन रहस्यमयी आवाजों का जिक्र किया था। जब ग्रामीणों ने जांच की तो कोई पशु नहीं मिला, लेकिन टीले के प्रति श्रद्धा और विश्वास गहरा गया। धीरे-धीरे यही स्थान शिवलिंग के रूप में पूजित होने लगा।
अर्धनारीश्वर स्वरूप में आराधना-
इस शिवलिंग में एक प्राकृतिक दरार दिखाई देती है, जिसके कारण श्रद्धालु इसे अर्धनारीश्वर स्वरूप मानकर पूजते हैं। शिवलिंग के पीछे भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की प्रतिमाएं स्थापित हैं, जो इस धाम की आध्यात्मिक आभा को और प्रखर बनाती हैं। महाशिवरात्रि के दिन यहां सुबह से ही भक्तों का तांता लगा है। श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। बढ़ते आकार वाला यह ‘जीवंत’ शिवलिंग आज भी आस्था और विज्ञान—दोनों के लिए रहस्य बना हुआ है।

