प्रवर्तन निदेशालय की जांच ने उगले राज, बैंक कर्मियों के साथ मिलकर आरजीपीवी के भ्रष्ट्र अधिकारियों ने किया था भ्रष्टाचार
भोपाल। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की टीम ने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के एफडी घोटाला मामले में मध्यप्रदेश के तीन ठिकानों सहित झारखंड के रांची और बोकारों में भी दबिश दी थी। ईडी की टीम ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत सर्चिंग की थी। ईडी ने प्रेसनोट जारी कर बताया कि टीम ने पूर्व कुलपति, पूर्व रजिस्ट्रार और पूर्व वित्त नियंत्रक के आवासीय परिसरों पर दबिश दी थी।
इस दौरान कई चल- अचल संपत्तियों के दस्तावेज भी बरामद किए गए। साथ ही ईडी की टीम ने विश्वविद्यालय के और पदाधिकारियों पर भी भोपाल के गांधी नगर थाने में दर्ज एफआइआर और चार्जशीट के आधार पर जांच शुरू की है।
1.90 करोड़ कीसंपत्ति फ्रीज
ईडी की टीम ने गांधीनगर थाने में दर्ज एफआइआर की जांच की तो पता चला कि विवि के करीब 20 करोड़ रुपए के फंड को निजी व्यक्ति और ट्रस्ट के खातों में डायवर्ट किया गया है। साथ ही पीएमएलए के जांच के दौरान बैंक खातों की जांच से पता चला कि यूनिवर्सिटी के फंड को प्रॉपर्टी, एफडी, म्यूचुअल फंड और ज्वैलरी में निवेश किया गया।
इस दौरान जांच में कुछ बैंकर्मियों की भी भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इस पर जांच शुरू कर दी गई है। इस दौरान करीब 1.90 करोड़ चल संपत्ति फ्रीज की और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए। पूरे मामले में ईडी की टीम अभी भी जांच कर रही है।

