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Biomedical Waste Treatment Plant : दिल्ली में जल्द शुरू होंगे दो नए बायोमेडिकल कचरा ट्रीटमेंट प्लांट, सरकार ने तय की डेडलाइन
Biomedical Waste Treatment Plant : नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने राजधानी में बायोमेडिकल कचरे के निपटान के लिए दो नए अत्याधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने का रास्ता साफ कर दिया है। इन प्लांट्स को निलोठी यूनिट के स्थान पर बनाया जाएगा, जिसे चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को निविदा प्रक्रिया को तेज करने और तीन महीने के भीतर बोली, मूल्यांकन, आवंटन और समझौते पर हस्ताक्षर पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं।
Biomedical Waste Treatment Plant : पर्यावरण मंत्री का निर्देश
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने डीपीसीसी को निविदा प्रक्रिया में तेजी लाने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ समयबद्ध और प्रभावी परिणाम सुनिश्चित करना है। तीन महीने की डेडलाइन में सभी औपचारिकताएं पूरी होनी चाहिए।" यह कदम दिल्ली में बढ़ते बायोमेडिकल कचरे की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण है।
Biomedical Waste Treatment Plant : बायोमेडिकल कचरे की चुनौती
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के अस्पतालों से प्रतिदिन लगभग 40 मीट्रिक टन बायोमेडिकल कचरा उत्पन्न होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में दिल्ली में केवल दो ट्रीटमेंट प्लांट हैं, जो समान जनसंख्या वाले पड़ोसी क्षेत्रों की तुलना में कम हैं। निलोठी यूनिट में जमीन, तकनीक, लॉजिस्टिक्स और क्षमता की कमी के कारण इसे चरणबद्ध तरीके से बंद करने का फैसला लिया गया है। नए प्लांट इस कमी को दूर करेंगे और कचरे का वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित करेंगे।
Biomedical Waste Treatment Plant : नए प्लांट्स के कवरेज क्षेत्र
दोनों नए बायोमेडिकल कचरा ट्रीटमेंट प्लांट निम्नलिखित क्षेत्रों को कवर करेंगे:
रीजन 1: पूर्वी दिल्ली, उत्तर-पूर्वी दिल्ली, शाहदरा
रीजन 2: पश्चिमी दिल्ली, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली, सेंट्रल दिल्ली
Biomedical Waste Treatment Plant : दीर्घकालिक समाधान की उम्मीद
अधिकारियों ने बताया कि निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों प्लांट जल्द शुरू होंगे। ये प्लांट दिल्ली में बायोमेडिकल कचरे की समस्या का स्थायी समाधान प्रदान करेंगे। पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगा, बल्कि स्वास्थ्य जोखिमों को भी कम करेगा।
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