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UP: बिजली बिल में 10% ईंधन अधिभार पर सख्ती: नियामक आयोग ने यूपीपीसीएल एमडी को फिर भेजा नोटिस

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UP: लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं से जून महीने के बिलों में वसूले जा रहे 10 प्रतिशत ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) शुल्क को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मामले में राज्य विद्युत नियामक आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए पावर कॉर्पोरेशन (यूपीपीसीएल) के प्रबंध निदेशक को दोबारा नोटिस जारी किया है। आयोग ने 19 जून तक इस अतिरिक्त शुल्क की वसूली का आधार बताने वाली विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।


उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग में याचिका दाखिल कर 10 प्रतिशत एफपीपीसीए वसूली को नियमों के विरुद्ध बताया है। उनका कहना है कि लाखों उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है, जबकि इसके समर्थन में आवश्यक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।


आयोग ने जताई नाराजगी

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि एफपीपीसीए से संबंधित सभी आंकड़े यूपीपीसीएल के पास उपलब्ध होने चाहिए और नियमानुसार इन्हें वेबसाइट पर भी प्रकाशित किया जाना चाहिए। बावजूद इसके, निगम आयोग को मांगी गई मूल जानकारी उपलब्ध नहीं करा सका। जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय मांगने पर भी आयोग ने असंतोष जताया। 


वसूली पर उठे कानूनी सवाल

उपभोक्ता परिषद का दावा है कि यदि शुल्क निर्धारण के लिए आवश्यक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, तो उपभोक्ताओं से की जा रही वसूली कानूनी रूप से संदेह के दायरे में आती है। आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए 19 जून तक सभी दस्तावेज और तथ्य पेश करने के निर्देश दिए हैं। अब उपभोक्ताओं की नजर आयोग के अगले फैसले पर टिकी हुई है।

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