नगरीय निकाय से जुड़े कानून में संशोधन की तैयारी, बदलाव हुआ तो डायरेक्ट होंगे अध्यक्षों के चुनाव...
MP News : भोपाल। एक बार फिर सरकार नगरीय निकाय से जुड़े कानून को बदलने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर नगरीय विभाग एवं आवास विभाग इसका ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। इस पर सहमति बनती है तो 2027 में होने वाले नगरीय निकायों के चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाएंगे। पांच साल में चौथी बार निकायों के चुनाव प्रक्रिया में बदलाव किया जा रहा है। नगरीय निकायों में नगरनिगम के मेयर और नगरपालिका व नगर परिषदों के अध्यक्ष पहले प्रत्यक्ष प्रणाली से चुने जाते थे पर 2019 में कमलनाथ सरकार ने इस प्रक्रिया में बदलाव करते हुए तय किया था कि अब ये चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाएंगे।
MP News : यानि पार्षद मेयर और अध्यक्षों को चुनेंगे। इसके बाद आई शिवराज सरकार ने दिसम्बर 2020 में इस व्यवस्था को समाप्त करते हुए इन चुनावों को फिर से प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने का निर्णय लिया था। इसके लिए अध्यादेश लाने की तैयारी थीपर किन्हीं कारणों से अध्यादेश नहीं आ पाया। मई 2022 में फिर चुनावी प्रक्रिया में बदलाव किया गया और मेयर के चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से और नगरपालिका और नगरपरिषदों में अध्यक्षों के चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने का निर्णय लिया गया। तब ऐसा विधायकों के कहने पर किया गया था। विधानसभा चुनाव करीब थे लिहाजा संगठन और सरकार ने उनकी मांग को मानते हुए सिर्फ मेयर का चुनाव ही डायरेकट इलेक्शन से कराया।अब फिर संगठन चाहता है कि नगर निगम के मेयर के साथ नगरपालिका और नगरपरिषद अध्यक्षों के चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाएं। इसके बाद से सरकार का नगरीय विकास विभाग इसका ड्राफ्ट तैयार कर रहा है।
MP News : जिला और जनपद अध्यक्षों के चुनाव भी प्रत्यक्ष प्रणाली से -
इधर जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत अध्यक्षों के चुनाव भी सरकार अब सीधे कराने की तैयारी में है। इसका ड्राफ्ट पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तैयार कर रहा है। पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद से ही ये चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होते आए है। यानि जिला पंचायत और जनपद सदस्य सीधे जनता के द्वारा चुने जाते हैं और उसके बाद वे अध्यक्ष का चुनाव करते हैं। इन चुनावों में सदस्यों के खरीद-फरोख्त के आरोप ज्यादा लगते रहे हैं। यही वजह है कि इन्हें अब सीधे जनता से कराने की तैयारी की जा रही है। अब तक इन चुनावों में राजनीतिक दलों की सीधी भागीदारी नहीं रहती। यानि ये चुनाव किसी पालिटिकल दल के सिंबल पर नहीं होते। यह बात अलहदा है कि राजनीतिक दलों की इसमें पूरी तौर पर भागीदारी रहती है और उसके समर्थन से ही जिला पंचायत और जनपद पंचायतों के सदस्य चुनाव लड़ते हैं। अब इस बात पर भी विचार किया जा रहा है कि इनमें राजनीतिक दल अपनी सीधी भागीदारी करे।

