वन्य जीवों को अन्य राज्यो में भेजने का विरोध, वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट ने रोक लगाने वन विभाग के साथ एनटीसीए को लिखा पत्र
- Rohit banchhor
- 20 Jan, 2025
शिकायत में एनटीसीए के निर्देशों पर ओडिशा में बाघों को भेजने से पहले चहां की सुरक्षा व्यवस्था और कानूनी प्रावधानों की समीक्षा करने की मांग की।
MP News : भोपाल। शहरों और गांवों में बाघों के मूवमेंट की खबरों के बीच मध्यप्रदेश के वन्यजीवों को अन्य राज्यों में भेजने की प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने इस मुद्दे पर राज्य के वन विभाग और एनटीसीए को पत्र लिखकर बाघों की ओडिशा, राजस्थान और छत्तीसगढ़ भेजने की कार्यवाही को रोकने की मांग की है। उन्होंने बाधों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिताएं व्यक्त की है। शिकायत में एनटीसीए के निर्देशों पर ओडिशा में बाघों को भेजने से पहले चहां की सुरक्षा व्यवस्था और कानूनी प्रावधानों की समीक्षा करने की मांग की।
MP News : यह भी उल्लेख किया कि पिछले साल ओडिशा के सिमलीपाल टाइगर रिजर्व में एक आध का शिकार हुआ था, जिसे लेकर चिंता जताई गई थी। इसके अलावा, 2018 में सतकोशिया टाइगर रिजर्व में भी एक बाघ का शिकार हुआ था, जो मध्य प्रदेश से भेजे गए थे। संजय धुबरी टाइगर रिजर्व से मादा वाधिन को ओडिशा भेजने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि ओडिशा में बाघों की संख्या बहुत कम है और वहां शिकार की स्थिति असुरक्षित है, इसलिए बाघों को वहां भेजना खतरनाक हो सकता है।
MP News : इसके अलावा भोपाल सर्किल में रातापानी के बाघों में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हैं। बाघों में फाइब्रोमा नामक बीमारी फैल रही है और एक बाघ को मौत भी हो चुकी है। इसके बावजूद वन विभाग द्वारा इस समस्या के समाधान के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने इस मामले में एनटीसीए से तत्काल दखल देने की अपील की है। वाइल्ड लाइफ एक्टविस्ट अजय दुबे ने एनटीसीए से आग्रह किया है कि वे अपने एसओपी और कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए बाधों को भेजने की प्रक्रिया को सुनिश्चित करें और उचित कदम उवाएं। उन्होंने पत्र के माध्यम से अधिकारियों से इस विषय पर त्वरित कार्रवाई की मांग की है, ताकि बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

