चूहे पालने वाला प्रदेश का पहला एनिमल हाउस बनेगा खुशी लाल विश्वविद्यालय, शोध के लिए पाले जाएंगे चूहे
भोपाल। जटिल बीमारियों के नए इलाज के अनुसंधान के लिए विशेष चूहों की जरूरत होती है। इन चूहों पर ही नई दवाओं को परीक्षण किया जाता है। अक्सर संस्थानों के लिए शोध से ज्यादा मुश्किल चूहों की व्यवस्था करना होता है। यही कारण है कि अब खुशीलाल आयुर्वेदिक कॉलेज में एनिमल हाउस तैयार किया जाएगा। इस हाउस में इन चूहों की ब्रीड तैयार की जाएगी।
यहां चूहे के अलावा शोध के लिए उपयुक्त खरगोश मेंढक जैसे जानवरों की ब्रीड भी तैयार की जाएगी। एनिमल हाउस के लिए जरूरी एनिमल एथिकल कमेटी भी बनेगी। इसमें चूहे, खरगोश मेंढक जैसे जानवरों पर शोध होंगे। इसके लिए तीन मंजिला बिल्डिंग तैयार हो गई है। साल 2025 में इस सेंटर की शुरूआत की जाएगी। इसके बाद खुशीलाल आयुर्वेदिक कॉलेज प्रदेश का पहला ऐसा आयुर्वेदिक कॉलेज होगा जहां खुद का एनिमल हाउस होगा।
रिसर्च सेंटर के नियुक्त होंगे विशेषज्ञ
कॉलेज में शोध के लिए फामॉकोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, पेथोलॉजी, वेटनरी विभाग में विशेषज्ञों की जरूरत होगी। वर्तमान में संस्थान के पास फार्माकोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और पेथोलॉजी के विशेषज्ञ मौजूद हैं। इसके अलावा अन्य की जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
अलग अलग विषयों में होगी रिसर्च
जानकारी के मुताबिक इस रिसर्च सेंटर में अलग- अलग विषयों पर शोध किया जाएगा। इसमें ग्राउंड व फर्स्ट फ्लोर पर फिजियोलॉजी फामार्कोलॉजी, बायोकेमेस्ट्री एनॉटॉमी जैसे विभाग रिसर्च करेंगे। वहीं सेकेण्ड फ्लोर पर माइक्रोबायोलॉजी विभाग वायरस जनित बीमारियों के लिए रिसर्च लैब होगी।
संचालन के लिए लेनी होगी सरकार से मंजूरी
कॉलेज में एनिमल हाउस तैयार करने के बाद इसके संचालन के लिए अब सरकार से मंजूरी लेनी होगी। हाउस तैयार होने के बाद एनिमल वेलफेयर बोर्ड को लाइसेंस के लिए एप्लीकेशन दी जाएगी। बताया गया है कि यहां की बोर्ड टीम आकर निरीक्षण करेगी। निर्धारित मापदंडों का पालन हो रहा है या नहीं इसकी रिपोर्ट तैयार करेगी। इनकी रिपोर्ट के आधार पर ही एनिमल हाउस खोले जाने की मंजूरी मिल सकेगी। यहां रहने वाले एनिमल्स को उपचार, पानी, के अलावा पेड़-पौधे आदि सुविधाएं होना अनिवार्य हैं। इसके बाद ही इसकी परमिशन मिल सकेगी।

