राजधानी का हमीदिया हॉस्पिटल नही दें रहा सही इलाज, रिव्यू मीटिंग में हुआ खुलासा
भोपाल। राजधानी भोपाल का गांधी मेडिकल कॉलेज मरीजों को ठीक से इलाज नहीं दे पा रहा है रिव्यू मीटिंग में इसका खुलासा हुआ है। मप्र में 17 मेडिकल कॉलेज हैं, सभी के अपने-अपने अस्पताल भी हैं, भोपाल का गांधी मेडिकल कॉलेज मरीजों को इलाज देने की दृष्टि से सबसे नीचे हैं। जबकि गांधी मेडिकल कॉलेज के पास 2 हजार बिस्तर का हमीदिया अस्पताल मौजूद है। इस बात का खुलासा पिछले सप्ताह हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग मीटिंग में हुआ है। दरअसल हर बुधवार को आयुक्त चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता में प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों की रिव्यू मीटिंग होती है।
इस बुधवार को हुई मीटिंग में जब मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों का रिव्यू किया गया तो पता चला कि जीएमसी का हमीदिया अस्पताल मरीजों को इलाज देने के मामले में सबसे पीछे है। इसके अलावा सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का भी पहां अंबार लगा हुआ है। जीएमसी की इस स्थिति पर आयुक्त चिकित्सा शिक्षा और संचालक चिकित्सा शिक्षा दोनों ने डीन को जमकर फटकार लगाई। उन्हें एक सप्ताह का समय दिया गया है, अगली बैठक से पहले स्थिति को सुधारने के भी निर्देश मिले हैं। इधर 17 सरकारी मेडिकल कॉलेजों की रैंकिंग में जीएमसी के पीछे रहने के कई कारण हैं, इसमें दूसरा सबसे बड़ा कारण है सीएम हेल्प लाइन की शिकायतों का अंबार।
दरअसल जीएमसी के पास हमीदिया और सुलतानिया जैसे दो बड़े अस्पताल है। सुल्तानिया अस्पताल में प्रसूताओं को जननी सुरक्षा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा योजना के तहत अर्थिक मदद के तौर पर 8 से 12 हजार रुपए दिए जाते हैं। शासन के पास बजट न होने के कारण कई हजार महिलाओं को इसकी राशि नहीं मिली है। जिसकी शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में इकट्ठा हो रही हैं। इसके अलावा देर रात आने वाले मरीज को जब समय पर उपचार नहीं मिलता तो वह भी सीएम हेल्प लाइन में शिकायत कर देता है। यही कारण है कि जीएमसी की रैंकिंग नीचे है।

